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गिलोय अर्क – बच्चों कि संपूर्ण समस्याओं का समाधान

गिलोय आयुर्वेद की एक ऐसी औषधी है। जिसका सेवन हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है। यह बेल के रूप में पाई जाती है और इसका आकार पान के पत्ते की तरह होता है। 6 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए यह बहुत लाभदायक होती है। असल में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़े लोगों से कम होती है इसलिए वे जल्दी बीमार हो जाते हैं। गिलोय अर्क शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जिसके कारण इसका सेवन करने वाले बीमार होने से आसानी से बच जाते हैं। गिलोय में प्रोटीन, कैल्शि‍यम तथा फॉस्फोरस काफी मात्रा में पाएं जाते हैं।

6 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए गिलोय के फ़ायदे –

1 – कई बार बच्चों में खून की कमी के कारण वे एनीमिया का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उनको गिलोय अर्क बहुत लाभ देता है। यदि बच्चों को गिलोय अर्क का सेवन पहले से कराया जाए तो वे एनीमिया का शिकार नहीं हो पाते हैं।

2 – पीलिया रोग में भी गिलोय अर्क का सेवन करना लाभदायक होता है। पीलिया रोग से पीड़ित बच्चे अथवा बड़े किसी भी उम्र के लोग इसका सेवन कर लाभ ले सकते हैं।

3 – यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यदि इसका सेवन प्रतिदिन किया जाए तो आने वाली अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।

4 – अक्सर बच्चों को डेंगू तथा टाइफाइड बुखार के बचाव में भी यह बहुत कारगर साबित होता है। ऐसी स्थिति में गिलोय अर्क का सेवन कराने पर बुखार से जल्दी निजात मिल जाती है और प्लेटलेट काउंट बढ़ना भी तेजी से शुरू हो जाता है।

5 – किसी भी प्रकार के रक्त विकार में बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

बच्चों के सेवन में आसानी –

यदि बच्चा आसानी से गिलोय अर्क का सेवन नहीं कर पा रहा है तो उसको दूध, शहद, गुनगुना पानी, जूस आदि के साथ मिलाकर भी इसको दिया जा सकता है। इन सब चीजों के साथ गिलोय अर्क को मिलाकर आसानी से बच्चे को दिया जा सकता है।

बच्चों के लिए गिलोय अर्क की सही मात्रा –

1 – 6 से 10 वर्ष के स्वस्थ बच्चों के लिए गिलोय अर्क की मात्रा 2 से 4 बूंद प्रतिदिन देनी चाहिए। 6 से 10 वर्ष के बीमार बच्चों में गिलोय अर्क की मात्रा 4 से 8 बूंद प्रतिदिन देनी चाहिए।

2 – 10 से 18 वर्ष के स्वस्थ बच्चों में गिलोय अर्क की मात्रा 4 से 8 बूंद प्रतिदिन देनी चाहिए। 10 से 18 वर्ष के बीमार बच्चों में गिलोय अर्क की मात्रा 10 से 12 बूंद प्रतिदिन देनी चाहिए।

आखिर गिलोय अर्क यूनिक क्यों है –

1 – आयुर्वेद में गिलोय को अमृता के नाम से भी जाना जाता है। क्यों की यह अमृत के समान ही शरीर की समस्त बीमारियों से रक्षा करता है। 

2 – गिलोय अर्क को हर उम्र के व्यक्ति को स्वस्थ तथा बिमार दोनों अवस्थाओं में दिया जा सकता है।

3 – गिलोय अर्क, गिलोय चूर्ण, टेबलेट या सीरप से ज्यादा प्रभावशाली और शीघ्र लाभ देने वाला होता है।

4 – गिलोय अर्क के सेवन से बच्चों में शारारिक, मानसिक तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

बच्चों में गिलोय अर्क का महत्व –

1 – यह बच्चों को फ्री रेडिकल्स डैमेज से सुरक्षित करता है तथा इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट मिलते हैं।

2 – इसका सेवन बच्चों को प्रदूषित हवा तथा वायरस से बचाता है अतः वे बीमारी से बच जाते हैं।

3 – अशुद्ध वातावरण के कारण बच्चों में भी अस्थमा की समस्या बढ़ती जा रही है। गिलोय अर्क का सेवन बच्चों को इस घातक समस्या से बचाता है।

4 – इसके सेवन से बच्चों में उदर विकार यानि पेट की समस्याएं नहीं होती हैं।

5 – बच्चों में अक्सर दस्त तथा पेचिस की समस्याएं हो जाती हैं। गिलोय अर्क के सेवन से बच्चों की ये समस्याएं दूर हो जाती हैं तथा आगे भी इन समस्याओं से बचाव रहता है।

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