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री- रैस्प – अस्थमा तथा सांस की समस्या का आयुर्वेदिक समाधान

अस्थमा तथा सांस की समस्या पिछले दो दशकों में बहुत तेजी से बढ़ी है। इसकी खासियत यह है की यह समस्या किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। आज बड़ी संख्या में बच्चों से लेकर बूढ़े लोग तक सांस की समस्या से ग्रसित हैं। सांस या अस्थमा की समस्या होने के कई कारण हैं। दूषित हवा, दूषित वातावरण, दवाओं के दुष्प्रभाव, इत्र या परफ्यूम जैसी खुशबू से भी यह समस्या हो जाती है। इस प्रकार की समस्याओं के लिए री- रैस्प कैप्सूल बहुत लाभकारी है। आइये अब आपको इस समस्या के कुछ मुख्य कारण बताते हैं।

सांस या अस्थमा की समस्या के कारण –

1 – दूषित वातावण।

2 – दूषित हवा।

3 – दवाओं के दुष्प्रभाव।

4 – इत्र या परफ्यूम की खुशबू।

5 –  बदलते मौसम के कारण।

6 – कॉकरोच या दीमक के कारण एलर्जी की बजह से।

7 – आनुवंशिक कारणों से।

8 – वृक्ष तथा घास के पराग कणों के कारण।

9 – धूम्रपान करने के कारण।

सांस या अस्थमा के लक्षण –

1 – सांस या अस्थमा रोग में व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होती है।

2 – सीने में जकड़न, घड़घड़ाहट का होना।

3 – सांस के साथ अधिक छींके, सर्दी लगना तथा नाक से पानी आना।

4 – सर्दी के मौसम में यह समस्या काफी बढ़ जाती है।

5 – व्यक्ति हर समय थकान महसूस करता है।

6 – व्यक्ति के तेज अथवा सीढ़ियां चढ़ने पर सांस लेने में समस्या होती है।

सांस या अस्थमा रोग का आयुर्वेदिक उपचार –

यह समस्या किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो जाती  है। छोटे बच्चों में यदि यह समस्या होती है तो उसका उपचार किस प्रकार से किया जाए। वही हम यहां बता रहें हैं। यदि ग्रसित कोई कोई बच्चा या वालिग है तो वह एक एक कैप्सूल सुबह शाम सेवन कर सकता है। आयुर्वेदिक री-रैस्प कैप्सूल को सुबह शाम एक एक कैप्सूल की मात्रा में गुनगुने पानी से देना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें –

इस प्रकार की समस्या में बाहरी चीजे जैसे – आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, ठंडा पानी आदि का परहेज रखना चाहिए। इसके अलावा धूप, धूल और प्रदूषित स्थानों से बचकर रहें। बाहर जाते समय मुंह के ऊपर मास्क लगाकर रखें। धूम्रपान न करें तथा धूम्रपान वाले वातावरण में न रहें। ज्यादा चिकनाई वाले पदार्थों को न खाएं। दिनभर में 10 से 12 गिलास गुनगुना पानी पीएं। भोजन को अच्छे से चवा कर ही खाएं।

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